Friday, December 15, 2023

मैंने गुलिस्तां देखा है

मैंने ख्वाबों के जहाँ मे एक गुलिस्तां देखा है, 

लगता है ज़मी पे आसमाँ देखा है, 

तुम आये तो मैंने गुलिस्तां देखा है, 

तुझमे ही मैंने सारा जहाँ देखा है।। 

Saturday, October 28, 2023

मेरे तरन्नुम

मेरे तरन्नुम की ख़्वाहिश है कि ऐसा फलसफा हो तेरा,

बेदर्द बेग़ैरत जो भी अंजाम हो तेरा,

हम सफे पहली क़द में तुझे ऐलान करते मिलेंगे,

मजनू, रांझा, महिबाल जैसा गुलिस्तां हो तेरा।।

दिल के पास

उफ़्फ़ ये दिक्कतें ये रुसवाई ये तन्हाई का मंज़र,

दिल के पास रहने वालों के ही हाथों में था खंज़र।।


Wednesday, May 10, 2023

खामखाँ

बहुत खामखाँ उलझनों में रहा,

मैं खामखाँ उसे पाने की ज़द में रहा,


रुकसत, शिकायत, मज़लूम, सितारे,

कोई न हुआ मैं जब भी राह ए मुश्किल में रहा।।

Friday, May 5, 2023

कारक

कारक तो कहीं नहीं है खुद के भीतर,

इक इक राज है यहां सबके भीतर,


महक जाते हैं इतने जो लाज़मी लिबास हैं उनके,

और उसपे चार चांद लगाकर इतर।।

Thursday, May 4, 2023

पुराने ज़ख़्म

बहुत कुछ अल्फ़ाज़ इकर ए जयां नही हो पाता,

कितना भी कोशिस कर लो एहसास ए अंदाज़ बयां नही हो पाता,


हम हर मुफ़्लिश से उनको बचाते रहे, और

वो कुरेद कुरेद कर पुराने ज़ख़्म सुलगाते रहे।।

Sunday, March 12, 2023

मुश्किलें

पतझड़ में जैसे पत्ते झड़ जाते हैं,

मतलब पूरे होने पे भी लोग बदल जाते हैं।

यूँही तमाम मुश्किलें आती रही ज़िन्दगी में,

मुश्किलें वही रही बस रास्तें बदल जाते हैं।।

Saturday, March 11, 2023

अब बहुत कर लिया

अब बहुत कर लिया वादा ए वफ़ा,

लगता है अब करना होगा,

एक दो को दफ़ा।।

Thursday, February 23, 2023

परिंदों का घरौंदा

बहुत बेवफा है मंज़र, काफ़ी बेरंग ज़माना है,

जो कहते थे ताउम्र साथ देंगे,

उन्होंने ही पहले दामन छोड़ा है।।

हम फिर भी गफ़लत में बाकी वादियों के चमन बन बैठे हैं,

जो बचे हैं रिश्तों में उन परिंदों का घरौंदा पुराना है।।

Monday, February 20, 2023

तमाम उमर

 मैं उसे पाने की जद में रहा,

वो मेरा दिल दुखाने की ज़िद में रहा,


रहा कुछ यूं कि गर्दीशो में सितारा रहा,

अपनों के बीच में भी रह कर तमाम उमर बेसहारा रहा।।

एक तस्व्व्वुर

एक तस्व्व्वुर एक ऐहतराम तेरा,

तुम्हारे तीर, दिल मेरा,

कर घायल मरहम खुद लगा दे,

कई ज़ख़्म और सब पे नाम तेरा।।।

Thursday, January 26, 2023

चंद सिफारिश

चंद सिफारिश, इक गुजारिश है आपसे,
बजाकर वीणा माँ कर दो मुक्त,
मुझको मेरे अंधकार से।।

Wednesday, January 25, 2023

इक बूंद

बहुत उदास दिल तमाम यूँ रहता है,

जैसे सूखे पत्ते को इक बूंद पानी का तलाश रहता है।।

Thursday, January 12, 2023

सिलसिला

 इक आख़िरी कोशिस इक फ़लसफ़ा तो हो,

उफ़्लतें निगाहें चार होंगी,

पहले शुरू ये सिलसिला तो हो।।

Saturday, January 7, 2023

ज़ुल्फों का छाँव

 मैं फ़ज्र इक मुलाक़ात चाहता हूँ,

आंखों में तेरी आफ़ताब चाहता हूँ,


चाहता और भी कुछ हूँ तमाम उलफ़्तों से तेरी,

फिलहाल तो इस तपती धूप में तेरी ज़ुल्फों का छाँव चाहता हूँ।।