Thursday, February 23, 2023

परिंदों का घरौंदा

बहुत बेवफा है मंज़र, काफ़ी बेरंग ज़माना है,

जो कहते थे ताउम्र साथ देंगे,

उन्होंने ही पहले दामन छोड़ा है।।

हम फिर भी गफ़लत में बाकी वादियों के चमन बन बैठे हैं,

जो बचे हैं रिश्तों में उन परिंदों का घरौंदा पुराना है।।

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