Wednesday, May 10, 2023

खामखाँ

बहुत खामखाँ उलझनों में रहा,

मैं खामखाँ उसे पाने की ज़द में रहा,


रुकसत, शिकायत, मज़लूम, सितारे,

कोई न हुआ मैं जब भी राह ए मुश्किल में रहा।।

Friday, May 5, 2023

कारक

कारक तो कहीं नहीं है खुद के भीतर,

इक इक राज है यहां सबके भीतर,


महक जाते हैं इतने जो लाज़मी लिबास हैं उनके,

और उसपे चार चांद लगाकर इतर।।

Thursday, May 4, 2023

पुराने ज़ख़्म

बहुत कुछ अल्फ़ाज़ इकर ए जयां नही हो पाता,

कितना भी कोशिस कर लो एहसास ए अंदाज़ बयां नही हो पाता,


हम हर मुफ़्लिश से उनको बचाते रहे, और

वो कुरेद कुरेद कर पुराने ज़ख़्म सुलगाते रहे।।