तुम दरिया बनो, मैं डूब जाऊँगा,
आसु बनके आँखों से बह जाऊंगा,
तुम बसा लेना फिर से इस तसवीर को,
मैं बनता ही घर, बिखर जाऊंगा.
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तुम दरिया बनो, मैं डूब जाऊँगा,
आसु बनके आँखों से बह जाऊंगा,
तुम बसा लेना फिर से इस तसवीर को,
मैं बनता ही घर, बिखर जाऊंगा.
एक अरसा जैसे बीत गया हो,
पानी आंखों से सूख गया हो,
तुम गए जैसे बनकर हवा,
हाथ से रेत जैसे फिसल गया हो,
एक अरसा जैसे बीत गया हो।।
मैंने ख्वाबों के जहाँ मे एक गुलिस्तां देखा है,
लगता है ज़मी पे आसमाँ देखा है,
तुम आये तो मैंने गुलिस्तां देखा है,
तुझमे ही मैंने सारा जहाँ देखा है।।
मेरे तरन्नुम की ख़्वाहिश है कि ऐसा फलसफा हो तेरा,
बेदर्द बेग़ैरत जो भी अंजाम हो तेरा,
हम सफे पहली क़द में तुझे ऐलान करते मिलेंगे,
मजनू, रांझा, महिबाल जैसा गुलिस्तां हो तेरा।।
उफ़्फ़ ये दिक्कतें ये रुसवाई ये तन्हाई का मंज़र,
दिल के पास रहने वालों के ही हाथों में था खंज़र।।