Friday, April 17, 2020

हम तो आपके हैं

अभी से बारिशों की आवाज डरा रही हैं,
जिनके दम से आहें भरते थे,
उनकी खामोशी सता रही हैं।।


नज़र नयन नजारे किसके हैं,
हम तो आपके हैं , फिर दीवाने किसके हैं।।

साँसें मुर्दों की चलती है

जो जल गए हैं उनके राख किधर हैं,
साँसें मुर्दों की चलती है जज़्बात किधर हैं,

उन्हें भी ख़बर है कि हमे ख़बर है,
जो चल रहे हैं रिश्ते, उनके आधार किधर है।।

Sunday, April 5, 2020

सपने सारे

बस मुकाम-ए-हासिल मंजर देख कर हैरान रह गया,

हम अपने घर मे थे, सपने सारे समसान हो गया।।।

इस तरह से क़ातिल

इस तरह से क़ातिल क़त्ल कर गए,
ना नाम आया हिस्से में ना मुक़ाम मिला मर के भी।।

Saturday, April 4, 2020

अर्सों पे रहने वाली

अरे कुदरत का भी देखो खेल,
अर्सों पे रहने वाली का भी है जमीं पे पैर।।

मैं तेरी नजरों

और भी जिक्रे मोहबत ए सलीके हैं तमाम मैं,
फिर भी
मैं तेरी नजरों से पी के न मरा तो क्या मरा।।

ये निग़ाहें पाक

तुम गर सुनने को हो मुखातिब तो खिदमत में तुम्हारे ये जहां लिख दूं,

कुछ लिखूँ तेरी ज़ुल्फ़ों की बातें, कुछ पे बाकी ये निग़ाहें पाक लिख दूं।।

हुआ कुछ यूं कि

रियाशते अपनी भी कहाँ कम थी,
निग़ाहें उल्फ़त की जी टकराई ना होती,

हुआ कुछ यूं कि सरका सिर से दुपटा, और टकराई नज़र,
जिना मेरा बेकार हो जाता , हुस्ने ताज तम्हारी गर, 
 आंखे ये मेरी दिखाई ना होती।।

हम तो बस तम्हे लिखते हैं

अरे वो अल्फ़ाज़ ही कहा जो खुल के मोहब्बत बयां कर दे,

हम तो बस तम्हे लिखते हैं, और कोई ऐसा मसला नही जो तुम्हे हल कर दे।।।

मेरी ही शायरी

मेरी ही शायरी पढ़कर वो मुक़ाम हासिल कर गयीं,

हमने जब लिखी उनकी बातें, जो हाशिले वफ़ा खफा कर गयी।।