Thursday, February 23, 2023

परिंदों का घरौंदा

बहुत बेवफा है मंज़र, काफ़ी बेरंग ज़माना है,

जो कहते थे ताउम्र साथ देंगे,

उन्होंने ही पहले दामन छोड़ा है।।

हम फिर भी गफ़लत में बाकी वादियों के चमन बन बैठे हैं,

जो बचे हैं रिश्तों में उन परिंदों का घरौंदा पुराना है।।

Monday, February 20, 2023

तमाम उमर

 मैं उसे पाने की जद में रहा,

वो मेरा दिल दुखाने की ज़िद में रहा,


रहा कुछ यूं कि गर्दीशो में सितारा रहा,

अपनों के बीच में भी रह कर तमाम उमर बेसहारा रहा।।

एक तस्व्व्वुर

एक तस्व्व्वुर एक ऐहतराम तेरा,

तुम्हारे तीर, दिल मेरा,

कर घायल मरहम खुद लगा दे,

कई ज़ख़्म और सब पे नाम तेरा।।।