Thursday, December 17, 2020

हमसफ़र

 चलो एक सफर में चलते हैं,

जहां मंजिल नहीं, तुम मेरे हमसफर बनो।

Thursday, November 26, 2020

उसके सुर्ख घावों पे

 है गुज़ारिश कोई सुन तो ले,

राहों से मेरे सारे काँटे चुन तो ले,


ऐसे मरहम बन जाऊं मैं, उसके सुर्ख घावों पे,

कोई ज़ख़्म दस्तक़ देने से पहले सोच तो ले।।।

Saturday, October 10, 2020

कुछ इस तरह वो नासाज़

 हमारी तबियत को कुछ इस तरह वो नासाज़ करती है,

निगाहें उठाकर ही सिर्फ क़ातिल क़त्लेआम करती है।।

वो हमारी जान सी है।।

 साँसों की गर्म लपटों में वो आग सी है,

जो हमारे पास है, वो हमारी जान सी है।।

उसी से दूर

 ये रातें इतनी करवटे बदलने को मजबूर कर रही है,

किसी के पास होने को था, उसी से दूर कर रही है।।

हमें जुदा कर दो।।

 तो दो इजाजत विदा कर दो,

हसीन गलतियों से हमें जुदा कर दो।।

Wednesday, September 16, 2020

अब मौसम शोक ग़मगिनो का

 मैं गुमनाम रहा तेरी गलियों से,

तू शौख मुजाहिर सपनों का,

तू चला गया, रुत चली गयी,

अब मौसम शोक ग़मगिनो का।।

Tuesday, July 28, 2020

गर्दिश-ए-मोहब्बत

कुछ ज़ख़्म मिले, कुछ पाता गया,
ऐसे ही ख्वाबो को जीता गया,
सर झुककर अब इबादत मांगता है,
किसके दर झुकु, ये सवाल आता गया।।

दायरों में सिमट कर अब हम भी रहने लगे,
जिनसे गर्दिश-ए-मोहब्बत थी,
धोखा भी उन्ही से खाता गया।।
🤗🤗

Monday, May 18, 2020

तुझमें खुदा देखूँ पे तू खुदा नहीं है।

कहना बहुत कुछ है पर तुमसे नहीं है,
जज़्बात की कद्र भींगा दे वैसे आँसू नहीं है,
इस तरह जिंदगी मिशालें दे रहीं,
तुझमें खुदा देखूँ पे तू खुदा नहीं है।।

Friday, April 17, 2020

हम तो आपके हैं

अभी से बारिशों की आवाज डरा रही हैं,
जिनके दम से आहें भरते थे,
उनकी खामोशी सता रही हैं।।


नज़र नयन नजारे किसके हैं,
हम तो आपके हैं , फिर दीवाने किसके हैं।।

साँसें मुर्दों की चलती है

जो जल गए हैं उनके राख किधर हैं,
साँसें मुर्दों की चलती है जज़्बात किधर हैं,

उन्हें भी ख़बर है कि हमे ख़बर है,
जो चल रहे हैं रिश्ते, उनके आधार किधर है।।

Sunday, April 5, 2020

सपने सारे

बस मुकाम-ए-हासिल मंजर देख कर हैरान रह गया,

हम अपने घर मे थे, सपने सारे समसान हो गया।।।

इस तरह से क़ातिल

इस तरह से क़ातिल क़त्ल कर गए,
ना नाम आया हिस्से में ना मुक़ाम मिला मर के भी।।

Saturday, April 4, 2020

अर्सों पे रहने वाली

अरे कुदरत का भी देखो खेल,
अर्सों पे रहने वाली का भी है जमीं पे पैर।।

मैं तेरी नजरों

और भी जिक्रे मोहबत ए सलीके हैं तमाम मैं,
फिर भी
मैं तेरी नजरों से पी के न मरा तो क्या मरा।।

ये निग़ाहें पाक

तुम गर सुनने को हो मुखातिब तो खिदमत में तुम्हारे ये जहां लिख दूं,

कुछ लिखूँ तेरी ज़ुल्फ़ों की बातें, कुछ पे बाकी ये निग़ाहें पाक लिख दूं।।

हुआ कुछ यूं कि

रियाशते अपनी भी कहाँ कम थी,
निग़ाहें उल्फ़त की जी टकराई ना होती,

हुआ कुछ यूं कि सरका सिर से दुपटा, और टकराई नज़र,
जिना मेरा बेकार हो जाता , हुस्ने ताज तम्हारी गर, 
 आंखे ये मेरी दिखाई ना होती।।

हम तो बस तम्हे लिखते हैं

अरे वो अल्फ़ाज़ ही कहा जो खुल के मोहब्बत बयां कर दे,

हम तो बस तम्हे लिखते हैं, और कोई ऐसा मसला नही जो तुम्हे हल कर दे।।।

मेरी ही शायरी

मेरी ही शायरी पढ़कर वो मुक़ाम हासिल कर गयीं,

हमने जब लिखी उनकी बातें, जो हाशिले वफ़ा खफा कर गयी।।

Monday, January 27, 2020

मेरे खातिर खुद को बचा कर लाना

तुम नज़रों की नज़ाकत लफ़्ज़ों पे ले आना,
कुछ दूर भी साथ चलना जो हो खुद को भी साथ ले आना,
मिले जो हमसे निग़ाहें तो क़ाफ़िर नजर फेर मत लेना,
जो बच जाओ खुद की निगरानी से तो,
मेरे खातिर खुद को बचा कर लाना।।

Monday, January 20, 2020

अपनी मोहब्बत को

क्यों अंजाम न दें हम अपनी मोहब्बत को,
गैरों से नहीं अपनों से बग़ावत होती है।।।

मेरी बाहों में

एक मर्ज़ फ़लसफ़ा रहता है मेरी निगाहों में,
जब भी तुम रहती हो अपने धड़कन के साथ मेरी बाहों में।।

Sunday, January 5, 2020

निग़ाहें क़त्ल

निग़ाहें क़त्ल और शिरत जाँच करती है,
अभी भी वो घूँघट में रहकर बड़ो को सलाम करती है,
माना कि मुसकान की वजह हम नहीं शायद,
तू खुश रहे ऐसा मेरा दिल ऐलान करती है।।

Saturday, January 4, 2020

ये इश्क़

उनको फुरशत नहीं,
हमको उल्फ़त नही,
ये इश्क़ चीज़ ही ऐसी है,
उनको चढ़ती नही,
हमको उतरती नही।।

यूँ शिकायत करती हो

यूँ शिकायत करती हो,
जमाने से शियाशत करती हो,
हुशन की तारीफ़ तो सभी करते हैं,
मगर बात तुम हमेशा दिल की करती हो

मजबूर नहीं हैं

माना कि दूर हैं,
मजबूर नहीं हैं,
तुम्हें चाहने की आदतें जरूर है,
तुमको पाना भी तो किसी गुरूर से कम नहीं है।।

रोज आऊंगा

रोज आऊंगा साथ बैठने को तेरे,
पर वही दुबारा नहीं आऊंगा,
इश्क़ की बातें तुम क्या जानों तमाशाबानो,
तुम किसी जमाने मे नहीं पाओगे,
जो गुल मैं खिला जाऊँगा।।

जरा खुद के बारे में भी सोचना

तुम्हें गर फ़ुरसत मिले कभी,
तो हमारे बारे में भी सोचना,
क्या सिर्फ मुझसे कमी रह गयी,
जरा खुद के बारे में भी सोचना।।

ऐसे ही बदनाम

मैं दायरों में रहकर प्यार नहीं करता,
जहाँ इश्क़ हो वहाँ व्यापार नहीं करता,
ऐसे ही बदनाम नहीं हैं हमारे गुलफ़ाम जानी,
जहाँ मजबूरी हो वहाँ तो बात भी नहीं करता।।

उसकी फ़िक़्र लग रही है

इस क़दर उसकी आदत गले लग रही है,
जैसे जैसे साँस छोरुँ,
उसकी फ़िक़्र लग रही है।।

सफर में हूँ

सफर में हूँ तो कुछ लिख लेता हूँ,
बड़ो को राम राम,
छोटो को प्यार देता हूँ।।

फिर मैं ही याद आऊंगा

मैं अलविदा तुझको ऐसे कर जाऊंगा,
जाते जाते आंखें नम कर जाऊंगा,
गर भूल भी जाये तू मुझको,
तो कोई बात नहीं,
सिमटोगी जब भी खुद की बाहों में,
फिर मैं ही याद आऊंगा।।