Tuesday, September 27, 2022

इक क़तरा आँसूं का

मैंने बाहें फैलायी और उसे दिया,

इक क़तरा आँसूं का फिर कभी न आने दिया ||

Tuesday, September 20, 2022

तुम हक़ीक़त हो मेरी

मैं कहूँ आफ़ताब तुम हक़ीक़त हो मेरी,

जब कुछ नही हो, तब भी जरूरत हो मेरी।

मेरी आँखों मे क्या तुम्हें सच नहीं दिखतें,

फिर क्यों ताकतें हो सर्द राहें मेरी।।

बिन कहे

खफ़ा होकर जब जुदा कर दिया,

बिन कहे ही उसने सब कह दिया,

मैं क्या था, क्या उसके निशां,

ये गैरों से तुमने क्या कह दिया।।

मैं खामखाँ रहा

 मैं खामखाँ रहा उसे पाने की जद में,

उसे भनक तक न लगी मेरी उसे पाने की तलब।।

उसे खोने के बाद।

हसरतें यूँ मिट गई तुम्हें पाने की तमन्ना में,

मैं मुद्दतों बाद सोया उसे खोने के बाद।।

Thursday, September 15, 2022

आपकी कमी

 बस चल रही है किसी तरह से ज़िंदगी,

हौले-हौले खलने लगी है आपकी कमी। ..