Friday, May 5, 2023

कारक

कारक तो कहीं नहीं है खुद के भीतर,

इक इक राज है यहां सबके भीतर,


महक जाते हैं इतने जो लाज़मी लिबास हैं उनके,

और उसपे चार चांद लगाकर इतर।।

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