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मैं फ़ज्र इक मुलाक़ात चाहता हूँ,
आंखों में तेरी आफ़ताब चाहता हूँ,
चाहता और भी कुछ हूँ तमाम उलफ़्तों से तेरी,
फिलहाल तो इस तपती धूप में तेरी ज़ुल्फों का छाँव चाहता हूँ।।
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