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मेरे तरन्नुम की ख़्वाहिश है कि ऐसा फलसफा हो तेरा,
बेदर्द बेग़ैरत जो भी अंजाम हो तेरा,
हम सफे पहली क़द में तुझे ऐलान करते मिलेंगे,
मजनू, रांझा, महिबाल जैसा गुलिस्तां हो तेरा।।
उफ़्फ़ ये दिक्कतें ये रुसवाई ये तन्हाई का मंज़र,
दिल के पास रहने वालों के ही हाथों में था खंज़र।।