है ख्वाहिशें, ख़्वाहिशों का शहर हो,
जहाँ तुम मेरे, हम तुम्हारे हो।।।
किसी शाम फिर मिलो, एक बात बतानी है,
जो बातें दिल में है, उसे आंखों से सुनानी है।।।
कुछ बीत गया कुछ बात बाकी है,
दरमियाँ हमारे ज़ज़्बात बाकी है,
कह दो तूफानों से हमें अब खौफ नहीं उसका,
एक शाम और एक मुलाक़ात बाकी है।।।
उन लम्हों में तेरी कमी भी खूब खलती है,
जैसे किसी शाम समंदर किनारें लहरों पर धूप जलती है।।।