Monday, January 27, 2020

मेरे खातिर खुद को बचा कर लाना

तुम नज़रों की नज़ाकत लफ़्ज़ों पे ले आना,
कुछ दूर भी साथ चलना जो हो खुद को भी साथ ले आना,
मिले जो हमसे निग़ाहें तो क़ाफ़िर नजर फेर मत लेना,
जो बच जाओ खुद की निगरानी से तो,
मेरे खातिर खुद को बचा कर लाना।।

Monday, January 20, 2020

अपनी मोहब्बत को

क्यों अंजाम न दें हम अपनी मोहब्बत को,
गैरों से नहीं अपनों से बग़ावत होती है।।।

मेरी बाहों में

एक मर्ज़ फ़लसफ़ा रहता है मेरी निगाहों में,
जब भी तुम रहती हो अपने धड़कन के साथ मेरी बाहों में।।

Sunday, January 5, 2020

निग़ाहें क़त्ल

निग़ाहें क़त्ल और शिरत जाँच करती है,
अभी भी वो घूँघट में रहकर बड़ो को सलाम करती है,
माना कि मुसकान की वजह हम नहीं शायद,
तू खुश रहे ऐसा मेरा दिल ऐलान करती है।।

Saturday, January 4, 2020

ये इश्क़

उनको फुरशत नहीं,
हमको उल्फ़त नही,
ये इश्क़ चीज़ ही ऐसी है,
उनको चढ़ती नही,
हमको उतरती नही।।

यूँ शिकायत करती हो

यूँ शिकायत करती हो,
जमाने से शियाशत करती हो,
हुशन की तारीफ़ तो सभी करते हैं,
मगर बात तुम हमेशा दिल की करती हो

मजबूर नहीं हैं

माना कि दूर हैं,
मजबूर नहीं हैं,
तुम्हें चाहने की आदतें जरूर है,
तुमको पाना भी तो किसी गुरूर से कम नहीं है।।

रोज आऊंगा

रोज आऊंगा साथ बैठने को तेरे,
पर वही दुबारा नहीं आऊंगा,
इश्क़ की बातें तुम क्या जानों तमाशाबानो,
तुम किसी जमाने मे नहीं पाओगे,
जो गुल मैं खिला जाऊँगा।।

जरा खुद के बारे में भी सोचना

तुम्हें गर फ़ुरसत मिले कभी,
तो हमारे बारे में भी सोचना,
क्या सिर्फ मुझसे कमी रह गयी,
जरा खुद के बारे में भी सोचना।।

ऐसे ही बदनाम

मैं दायरों में रहकर प्यार नहीं करता,
जहाँ इश्क़ हो वहाँ व्यापार नहीं करता,
ऐसे ही बदनाम नहीं हैं हमारे गुलफ़ाम जानी,
जहाँ मजबूरी हो वहाँ तो बात भी नहीं करता।।

उसकी फ़िक़्र लग रही है

इस क़दर उसकी आदत गले लग रही है,
जैसे जैसे साँस छोरुँ,
उसकी फ़िक़्र लग रही है।।

सफर में हूँ

सफर में हूँ तो कुछ लिख लेता हूँ,
बड़ो को राम राम,
छोटो को प्यार देता हूँ।।

फिर मैं ही याद आऊंगा

मैं अलविदा तुझको ऐसे कर जाऊंगा,
जाते जाते आंखें नम कर जाऊंगा,
गर भूल भी जाये तू मुझको,
तो कोई बात नहीं,
सिमटोगी जब भी खुद की बाहों में,
फिर मैं ही याद आऊंगा।।