Tuesday, January 29, 2019

वादे से मुकर जाना

ज़िन्दगी की कशमकश से परेशान बहुत है,
दिल को न उलझाओ ये नादान बहुत है।
यूं सामने आ जाने पर कतरा के गुजरना,
वादे से मुकर जाना उसे आसान बहुत है।

बेमुरब्बत-ए-उतर का

मैं अपने दर्द पर आँसूओं की पट्टी बांध दिया करता था, 
कुछ जख्म ऐसे थें जिन्हें ढाँक लिया करता था,
वो अफसोस न करें बेमुरब्बत-ए-उतर का,
वो आज भी हम हीं हैं, जो कल तक आवाज दिया करता था ।

और मैं कमब्ख़त वफ़ा लिखता हूँ

वो तर्ज़ की आहटों पर अलविदा लिखती हैं,
मैं बातों पर उनकी सजदा लिखता हूँ,
वक़्त की आँखों में मैं रह ही कहाँ गया था ?
ज़माने सजा लिखतें हैं, और मैं कमब्ख़त वफ़ा लिखता हूँ। 

ख्वाहिशों की तपिश


मैं ख्वाहिशों की तपिश में खामोखाँ तप रहा था,
जब कि वो सर्द मौसम हमारा न था ।

बेवजह ही बदनाम

दिल-ए-रुखसार की खवाहिश आबरू बन चुकी है,
मोहब्बत होनी थी जिनसे वो अब क़ायनात की माशूक़ बन चुकी है,
हम तो बेवजह ही बदनाम हैं आशिक़ों की बस्ती में,
एक ही घर था मेरा वो भी अब ताबूत बन चुकी है। 

है खफा जिंदगी

है खफा जिंदगी, पर कितनी ? 
ये कोई नही बता रहा ।
हम जा रहे मनाने उसको,
है खफा, जिंदगी ये नही जता रहा ।

जज्बात उनके भी अधूरे हैं ।

कुछ इखतियार हमने भी बरते,
कुछ लबों को हमने भी समेटे हैं,
कुछ खयालात उनके भी उभरे,
कुछ जज्बात उनके भी अधूरे हैं ।

Friday, January 25, 2019

शौख है डूबने का

हम तो यूँही साहिब गोते लगाते फिरते हैं,
वरना किसे शौख है डूबने का ??

Monday, January 21, 2019

हमने अपनों को खोया

लफ्क़ूज़ियत की शराबोर अब शियाशत न कर,
हमने अपनों को खोया है, यहीं किनारें होकर,
नौका-ए-सहारा आजमाइश न कीजिये,
हमने खुद को संभाला है, यहीं खुद को लुटा कर। 

Tuesday, January 8, 2019

अलफ़ाज़ नहीं थें

अलफ़ाज़ नहीं थें जो अपनी ख़ामोशी को ब्याँ करतें ,
खुश रखते और सलामती की दुआ करते,
वो मौसम ही कुछ ऐसा था,
ना ज़िक्र करते और ना जीने की फ़रियाद करतें।