Wednesday, October 30, 2019

तू बेवफा नहीं है

लो हम मान लेते हैं कि तू बेवफा नहीं है,
पर तु साथ होकर भी तो साथ नहीं है।।
#आशु

तेरा वादा

हर दफ़ा तेरा वादा मुझे रुलाता गया,
मैंने लफ़्ज क्या छोड़े तू मुझे ही भुलाता गया।।
#आशु

Tuesday, October 29, 2019

इशारों में लफ़्ज

ये इशारों में लफ़्ज अधूरे से रह गए हैं,
किसी के बाहों में भी होकर पूरे हो गए हैं ।।
#आशु

नाजुक सी नजर

नाजुक सी नजर पड़ी तो क़त्ले आम कर गयी,
हम तो वैसे भी मर ही रहे थे,
फिर ये अदा उनकी सारा काम कर गयी।।
#आशु

Monday, October 28, 2019

उसके आँखों के एक क़तरे

मैं आज भी रोता हूँ उसके आँखों के एक क़तरे को देख कर,
और वो कहती है तुम हर बात पे रोते हो।।
#आशु

मजहब को किनारे

वो मजहब को किनारे रख मेरे मंदिर में माथा टेकती थी,
मैंने भी उस बाबा के मज़ार का चादर ओढ़ा था।।
#आशु

Saturday, October 26, 2019

मुझे ही बेवफा लिखता है

हमने देखा है..
वो भी लिखता है, सनम आरजू, शायद वफ़ा लिखता है,
कहने को कुछ है नही अब तो वो मुझे ही बेवफा लिखता है ।।

Friday, October 25, 2019

एक हसीन ख़्वाब

मोहब्बत एक हसीन ख़्वाब सी लगती है,
पास होकर भी जुदाई सी लगती है।।
#आशु

Thursday, October 24, 2019

मेरी भरी जवानी

ये नज़राना भी उसका गुजर शाम सा गया,
जाते जाते, दिल मेरा बर्बाद कर गया,
जो होश बाकी था, उसकी याद में ऐब,
मेरी भरी जवानी नीलाम कर गया ।।
#आशु

बेवफा की मोहब्बत

सुना है उस बेवफा की मोहब्बत बिक रही है,
अब औरों को भी उसमें मिलावट मिल रही है ।।
#आशु

Wednesday, October 23, 2019

उसकी निग़ाह

उसकी निग़ाह आज भी खंज़र का काम करती है,
उठ के झुके, फिर झुक के उठे तो बवाल करती है ।।
#आशु

किसी और के साथ

तमाम उम्र गुजर रही है उसकी याद में,
सीने से लिपट कर सोती है किसी और के साथ में ।।
#आशु

Tuesday, October 22, 2019

होटों की गरमाहट

उसकी नर्म होटों की गरमाहट जब भी मेरे नाम को छुआ है,
अये खुदा कैसे कहूँ की वो आज भी मुझसे जुदा है ।।
#आशु

उसका ख़त

मुक़्क़द्दर की बात तो नहीं शायद, उसका ख़त आज भी आता है,
बिना चाहत के भी ऐसे भला रिश्ता कौन निभाता है ।।
#आशु

Monday, October 21, 2019

मेरी मौत

इधर मुकर्रर मेरी मौत की तारीख़ हो रही है,
उस बेवफ़ा की अब शादी हो रही है ।।
#आशु

आखिरी ख़्वाहिश

आखिरी ख़्वाहिश की इन्तेहाँ लिख रहा था,
वो अपने जख़्म की साज़ो पर मेरा नाम लिख रहा था ।।
#आशु

Friday, October 18, 2019

मैं अपनी हाथ खींच लूंगा

मैं सबब अपनी आदतों से इंक़लाब लिख दूँगा,
उसकी बेवफ़ाई के क़िस्से सरेआम लिख दूँगा,
जाना ही था उसे वो बहाना ढूँढ़ने लगे,
उसे आगे बढ़ा कर मैं अपनी हाथ खींच लूंगा ।।

उठ गया जनाजा

मुद्दतों से जिसकी तलाश थी,
वो भी मिल गयी आख़िरी साँस पर,
बांध के कफ़न उठ गया जनाजा,
एक झलक को तरशे इशी आश पर ।।
#आशु

Monday, October 14, 2019

मोहब्बत सिर्फ तुझसे

लिपटकर तुझसे तेरे जिस्म की अगुवाई करना है,
अब जितनी बार भी हो मोहब्बत सिर्फ तुझसे करना है ।।
#आशु

Wednesday, October 9, 2019

फिर कभी

वो साज नहीं मैं जो फिर से दोहराया जाऊँ,
गर चला गया कभी, फिर कभी न लौट आऊँ ।।
#आशु

असर तेरी यादों

कुछ असर तेरी यादों में भी छोड़ जाता हूँ,
कितना बेबश था तब यह बतलाता हूँ ।।
#आशु

Tuesday, October 8, 2019

बस मुलाक़ात

यूँ लगा कि मेरी बात हुई है,
जरा उनसे कह दो अभी तो बस मुलाक़ात हुई है ।।

Sunday, October 6, 2019

मेरी जान

तुम्हारी याद ऐसे आती है,
हर साँस पर मेरी जान जाती है ।।
#आशु

Thursday, October 3, 2019

बेवफ़ा तेरा ज़िक्र

आख़िरी नज़्म लिख देता, बेवफ़ा तेरा ज़िक्र लिख देता,
मोहबत-ए-वादा जो हमने न कि होती, हर एक क़लमा में तेरा फ़िक्र लिख देता ।।
#आशु

Wednesday, October 2, 2019

पर ये हरक़त-ए-बचकानी सच्ची लगती है

इस क़दर मेरी यूँ कहानी भी अच्छी लगती है,
तेरी शुर्ख जवानी भी कच्ची लगती है,
माना तुझे तज़ुर्बा हो बहोत शायद,
पर ये हरक़त-ए-बचकानी सच्ची लगती है ।।
#आशु

Tuesday, October 1, 2019

वो क़ातिल भी हैं ।

बेमुर्बत हैं वो ज़ालिम भी हैं,
निग़ाहें इतनी नशीली हैं कि वो क़ातिल भी हैं ।।
#आशु