तुम मिले थे मुझे कहीं किसी मोड़ पर,
क्या वो ख्वाहिशो का दिन था ?
आज मेरी आँखों की जो चमका रही थी,
वो आज आज़ादी का दिन था ?
तेरी हर बात पर मेरा यूँ मुस्कुराना,
तबज़्ज़ो देना हर मुक़ाम को,
यूँ ही हर नजर की तलाश में,
हम भटकटें है हर शाम को ||
क्या , आज आज़ादी का दिन था ?
क्या वो ख्वाहिशो का दिन था ?
आज मेरी आँखों की जो चमका रही थी,
वो आज आज़ादी का दिन था ?
तेरी हर बात पर मेरा यूँ मुस्कुराना,
तबज़्ज़ो देना हर मुक़ाम को,
यूँ ही हर नजर की तलाश में,
हम भटकटें है हर शाम को ||
क्या , आज आज़ादी का दिन था ?
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