मैं ढूँढ़ रहा था रस्ते-निग़ाहेँ दर-बदर,
आप का निशाँ कहीं भी मिला नहीं,
कोई मंजिल हमसे छुपी नहीँ,
कोई मंज़र हमसे बचा नहीं |
सभी पूछ रहे थे, आप क्या ढूंढ़ रहें हैं ?
ये बेवसी किसकी है ?
क्या बताएँ किसको बताएँ ?
ढूंढ़ रही है निग़ाहें जिसको वो बेक़रारी किसकी है ?
आप का निशाँ कहीं भी मिला नहीं,
कोई मंजिल हमसे छुपी नहीँ,
कोई मंज़र हमसे बचा नहीं |
सभी पूछ रहे थे, आप क्या ढूंढ़ रहें हैं ?
ये बेवसी किसकी है ?
क्या बताएँ किसको बताएँ ?
ढूंढ़ रही है निग़ाहें जिसको वो बेक़रारी किसकी है ?
1 comment:
goog.....
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