राहें भी तेरी तलब के शिकार हो गए हैं,
कश्ती को भी लहरों की दरकार हो गए हैं,
कोई देख न ले तेरी ख्वाहिशों को ऐ हवा,
जरा उनसे पूछ के तो बता की,
तुम किधर हो ?
कश्ती को भी लहरों की दरकार हो गए हैं,
कोई देख न ले तेरी ख्वाहिशों को ऐ हवा,
जरा उनसे पूछ के तो बता की,
तुम किधर हो ?
No comments:
Post a Comment