Tuesday, September 21, 2021

उनसे उलफ़त निगाहें

 मैं कोशिशें लगातार करता हूँ,

उनसे उलफ़त निगाहें चार न हों,

चार दिन की ज़िंदगी है मुसाफिर,

कभी उनकी हार न हो, कभी हमारी हार न हो।।

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