Saturday, April 4, 2020

हुआ कुछ यूं कि

रियाशते अपनी भी कहाँ कम थी,
निग़ाहें उल्फ़त की जी टकराई ना होती,

हुआ कुछ यूं कि सरका सिर से दुपटा, और टकराई नज़र,
जिना मेरा बेकार हो जाता , हुस्ने ताज तम्हारी गर, 
 आंखे ये मेरी दिखाई ना होती।।

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