Wednesday, October 2, 2019

पर ये हरक़त-ए-बचकानी सच्ची लगती है

इस क़दर मेरी यूँ कहानी भी अच्छी लगती है,
तेरी शुर्ख जवानी भी कच्ची लगती है,
माना तुझे तज़ुर्बा हो बहोत शायद,
पर ये हरक़त-ए-बचकानी सच्ची लगती है ।।
#आशु

No comments: